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मैं नहीं मानता दस्तूर हबीब जालिब

  मैं नहीं मानता हबीब जालिब दीप जिस का महल्लात ही में जले चंद लोगों की ख़ुशियों को ले कर चले महल्लात = Big Palace वो जो साए में हर मस्लहत के पले ऐसे दस्तूर को सुब्ह-ए-बे-नूर को मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता साए = Shadow, मस्लहत = Advice, दस्तूर = Culture, Rule, सुब्ह-ए-बे-नूर = Morning without Light मैं भी ख़ाइफ़ नहीं तख़्ता-ए-दार से मैं भी मंसूर हूँ कह दो अग़्यार से ख़ाइफ़ = Fearful, तख़्ता-ए-दार = Hanging place, अग़्यार = Enemy मंसूर = Someone who has God to his side, Winner, क्यूँ डराते हो ज़िंदाँ की दीवार से ज़ुल्म की बात को जहल की रात को मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता ज़िंदाँ = Prison, जहल = Uncultured thing फूल शाख़ों पे खिलने लगे तुम कहो जाम रिंदों को मिलने लगे तुम कहो चाक सीनों के सिलने लगे तुम कहो इस खुले झूट को ज़ेहन की लूट को मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता जाम = Drink, रिंदों = Drunkards, चाक = Tatter cloths, ज़ेहन = Mind तुम ने लूटा है सदियों हमारा सुकूँ अब न हम पर चलेगा तुम्हारा फ़ुसूँ चारागर दर्दमंदों के बनते हो क्यूँ तुम नहीं चारागर कोई माने मगर मैं नहीं मानता मैं नही...