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Showing posts with the label Lyrics of Famous Songs

लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी - अल्लामा इक़बाल

लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी अल्लामा इक़बाल      लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी ज़िंदगी शम आ  की सूरत हो ख़ुदाया मेरी लब = Lips,  तमन्ना = Desire,  शम आ  = Light दूर दुनिया का मिरे दम से अंधेरा हो जाए! हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाए हो मिरे दम से यूं ही मेरे वतन की ज़ीनत जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत ज़ीनत = Beauty,  चमन = Garden ज़िंदगी हो मिरी परवाने की सूरत या-रब इल्म की शम आ  से हो मुझ को मोहब्बत या-रब परवा ना = Moth,  इल्म = Knowledge हो मिरा काम ग़रीबों की हिमायत करना दर्द-मंदों से ज़ईफ़ों से मोहब्बत करना हिमायत = Advocacy,  दर्द-मंदों = Sympathizer,  ज़ईफ़ों = Old People मिरे अल्लाह! बुराई से बचाना मुझ को नेक जो राह हो उस रह पे चलाना मुझ को

किसी पत्थर की मूरत से

 किसी पत्थर की मूरत से साहिर लुधियानवी किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है  परस्तिश की तमन्ना है इबादत का इरादा है  जो दिल की धड़कनें समझे न आँखों की ज़बाँ समझे  नज़र की गुफ़्तुगू समझे न जज़्बों का बयाँ समझे  उसी के सामने उस की शिकायत का इरादा है  सुना है हर जवाँ पत्थर के दिल में आग होती है  मगर जब तक न छेड़ो शर्म के पर्दे में सोती है  ये सोचा है कि दिल की बात उस के रू-ब-रू कर दें  हर इक बेजा तकल्लुफ़ से बग़ावत का इरादा है  मोहब्बत बे-रुख़ी से और भड़केगी वो क्या जाने  तबीअ'त इस अदा पर और फड़केगी वो क्या जाने  वो क्या जाने कि अपनी किस क़यामत का इरादा है

आरम्भ है प्रचण्ड

  आरम्भ है प्रचण्ड, बोले मस्तकों के झुंड आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो आरम्भ है प्रचण्ड, बोले मस्तकों के झुंड आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो आन बान शान या कि जान का हो दान आज इक धनुष के बाण पे उतार दो आरम्भ है प्रचण्ड, बोले मस्तकों के झुंड आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो आन बान शान या कि जान का हो दान आज इक धनुष के बाण पे उतार दो आरम्भ है प्रचण्ड... मन करे सो प्राण दे, जो मन करे सो प्राण ले वही तो एक सर्वशक्तिमान है मन करे सो प्राण दे, जो मन करे सो प्राण ले वही तो एक सर्वशक्तिमान है कृष्ण की पुकार है, ये भागवत का सार है कि युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है कौरवों की भीड़ हो या पांडवों का नीड़ हो जो लड़ सका है वो ही तो महान है जीत की हवस नहीं, किसी पे कोई वश नहीं क्या ज़िन्दगी है ठोकरों पे मार दो मौत अंत है नहीं, तो मौत से भी क्यों डरें ये जा के आसमान में दहाड़ दो आरम्भ है प्रचंड... आरम्भ है प्रचण्ड, बोले मस्तकों के झुंड आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो आन बान शान या कि जान का हो दान आज इक धनुष के बाण पे उतार दो आरम्भ है प्रचंड...  वो दया का भाव, या कि शौर्य का चुनाव या कि हार का वो घ...