Skip to main content

Posts

Showing posts with the label Shayri

तराना ऐ मिल्ली Tarana-e-Milli Allama Iqbal अल्लामा इक़बाल

चीन ओ अरब हमारा, हिन्दोस्तां हमारा Allama Iqbal अल्लामा इक़बाल   चीन ओ अरब हमारा, हिंदोस्तां हमारा मुस्लिम हैं हम, वतन है सारा जहाँ हमारा तौहीद की अमानत, सीनों में है हमारे आसाँ नहीं मिटाना, नाम ओ निशाँ हमारा तौहीद = thought that there is only one God,  दुनिया के बुतक़दों में, पहले वह घर खुदा का  हम इस के पासबाँ हैं, वो पासबाँ हमारा बुतक़दों = House of Idols,  पासबाँ = Watchman तेग़ों के साये में हम, पल कर जवाँ हुए हैं ख़ंजर हिलाल का है, क़ौमी निशाँ हमारा तेग़ों = Sword,  हिलाल = New Moon,  क़ौमी निशाँ = National Sign मग़रिब की वादियों में, गूँजी अजां हमारी थमता न था किसी से, सैल-ए-रवाँ हमारा मग़रिब = West Direction,  सैल-ए-रवाँ = Flood बातिल से दबने वाले, ऐ आसमाँ नहीं हम सौ बार कर चुका है, तू इम्तिहाँ हमारा बातिल = Liar ऐ गुलिस्ताँ-ए-अन्द्लुस वो दिन हैं याद तुझको था तेरी डालियों में, जब आशियाँ हमारा गुलिस्ताँ = Garden, अन्द्लुस = Old name of France ऐ मौज ए दजला, तू भी पहचानती है हमको अब तक है तेरा दरिया, अफ़साना...

सारे जहाँ से अच्छा या तराना-ए-हिन्दी

  सारे जहाँ से अच्छा  या  तराना-ए-हिन्दी It was written by Allama Iqbal in 1905. It was published in 'Bang e  Dara'. सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा। हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्ताँ हमारा॥ ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में। समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा॥ सारे... परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का। वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा॥ सारे... गोदी में खेलती हैं, उसकी हज़ारों नदियाँ। गुलशन है जिनके दम से, रश्क-ए-जिनाँ हमारा॥ सारे.... ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा! वो दिन है याद तुझको। उतरा तेरे किनारे, जब कारवाँ हमारा॥ सारे... मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना। हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्ताँ हमारा॥ सारे... यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा, सब मिट गए जहाँ से। अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशाँ हमारा॥ सारे... कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी। सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा॥ सारे... 'इक़बाल' कोई महरम, अपना नहीं जहाँ में। मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहाँ हमारा॥ सारे...  

मैं नहीं मानता दस्तूर हबीब जालिब

  मैं नहीं मानता हबीब जालिब दीप जिस का महल्लात ही में जले चंद लोगों की ख़ुशियों को ले कर चले महल्लात = Big Palace वो जो साए में हर मस्लहत के पले ऐसे दस्तूर को सुब्ह-ए-बे-नूर को मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता साए = Shadow, मस्लहत = Advice, दस्तूर = Culture, Rule, सुब्ह-ए-बे-नूर = Morning without Light मैं भी ख़ाइफ़ नहीं तख़्ता-ए-दार से मैं भी मंसूर हूँ कह दो अग़्यार से ख़ाइफ़ = Fearful, तख़्ता-ए-दार = Hanging place, अग़्यार = Enemy मंसूर = Someone who has God to his side, Winner, क्यूँ डराते हो ज़िंदाँ की दीवार से ज़ुल्म की बात को जहल की रात को मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता ज़िंदाँ = Prison, जहल = Uncultured thing फूल शाख़ों पे खिलने लगे तुम कहो जाम रिंदों को मिलने लगे तुम कहो चाक सीनों के सिलने लगे तुम कहो इस खुले झूट को ज़ेहन की लूट को मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता जाम = Drink, रिंदों = Drunkards, चाक = Tatter cloths, ज़ेहन = Mind तुम ने लूटा है सदियों हमारा सुकूँ अब न हम पर चलेगा तुम्हारा फ़ुसूँ चारागर दर्दमंदों के बनते हो क्यूँ तुम नहीं चारागर कोई माने मगर मैं नहीं मानता मैं नही...

व-यबक़ा-वज्ह-ओ-रब्बिक (हम देखेंगे) Ham Dekhenge

हम देखेंगे फैज़ अहमद फैज़ हम देखेंगे लाज़िम है कि हम भी देखेंगे लाज़िम = Compulsory वो दिन कि जिस का वादा है जो लौह-ए-अज़ल में लिख्खा है लौह-ए-अज़ल = The eternal slate on which the destiny of the whole universe from start to end has been recorded जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गिराँ रूई की तरह उड़ जाएँगे ज़ुल्म-ओ-सितम = Oppression, कोह-ए-गिराँ = Big Mountains हम महकूमों के पाँव-तले जब धरती धड़-धड़ धड़केगी महकूमों = Public which is ruled by someone और अहल-ए-हकम के सर-ऊपर जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी अहल-ए-हकम = Tyrant जब अर्ज़-ए-ख़ुदा के काबे से सब बुत उठवाए जाएँगे अर्ज़-ए-ख़ुदा = Earth created by God, बुत = Idols हम अहल-ए-सफ़ा मरदूद-ए-हरम मसनद पे बिठाए जाएँगे अहल-ए-सफ़ा = People with Pure Character, मसनद = Position of Respect मरदूद-ए -हरम = Persons who have been rejected or thrown from a respectable place सब ताज उछाले जाएँगे सब तख़्त गिराए जाएँगे बस नाम रहेगा अल्लाह का जो ग़ाएब भी है हाज़िर भी जो मंज़र भी है नाज़िर भी ग़ाएब = Invisible, हाज़िर = Visible, मंज़र = easily seen, नाज़िर= Observer उट...