चीन ओ अरब हमारा, हिन्दोस्तां हमारा Allama Iqbal अल्लामा इक़बाल चीन ओ अरब हमारा, हिंदोस्तां हमारा मुस्लिम हैं हम, वतन है सारा जहाँ हमारा तौहीद की अमानत, सीनों में है हमारे आसाँ नहीं मिटाना, नाम ओ निशाँ हमारा तौहीद = thought that there is only one God, दुनिया के बुतक़दों में, पहले वह घर खुदा का हम इस के पासबाँ हैं, वो पासबाँ हमारा बुतक़दों = House of Idols, पासबाँ = Watchman तेग़ों के साये में हम, पल कर जवाँ हुए हैं ख़ंजर हिलाल का है, क़ौमी निशाँ हमारा तेग़ों = Sword, हिलाल = New Moon, क़ौमी निशाँ = National Sign मग़रिब की वादियों में, गूँजी अजां हमारी थमता न था किसी से, सैल-ए-रवाँ हमारा मग़रिब = West Direction, सैल-ए-रवाँ = Flood बातिल से दबने वाले, ऐ आसमाँ नहीं हम सौ बार कर चुका है, तू इम्तिहाँ हमारा बातिल = Liar ऐ गुलिस्ताँ-ए-अन्द्लुस वो दिन हैं याद तुझको था तेरी डालियों में, जब आशियाँ हमारा गुलिस्ताँ = Garden, अन्द्लुस = Old name of France ऐ मौज ए दजला, तू भी पहचानती है हमको अब तक है तेरा दरिया, अफ़साना...
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