हमेशा देर कर देता हूं मैं मुनीर नियाज़ी हमेशा देर कर देता हूं मैं ज़रूरी बात कहनी हो कोई वादा निभाना हो उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो हमेशा देर कर देता हूं मैं मदद करनी हो उसकी यार का ढांढस बंधाना हो बहुत देरीना रास्तों पर किसी से मिलने जाना हो हमेशा देर कर देता हूं मैं बदलते मौसमों की सैर में दिल को लगाना हो किसी को याद रखना हो किसी को भूल जाना हो हमेशा देर कर देता हूं मैं किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो हमेशा देर कर देता हूं मैं मुनीर नियाज़ी
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